SHARE BAJAR | MARKET ME SAFALTA PANE KE TARIKE
शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है यह बात सही है| लेकिन यदि शेयर बाजार में निवेश के कुछ पक्के नियमों का धैर्य से, परिश्रम से और लगन से उपयोग किया जाए तो जोखिम को काफी कम किया जा सकता है तथा निवेश की गयी पूंजी को दोगुना तिगुना भी किया जा सकता है| आइये कुछ ऐसे नियम देखते हैं जिनका उपयोग करके शेयर बाजार में सफलता पायी जा सकती है:-
1) क्योंकि शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है इसलिए निवेशक को सबसे पहले अपने आप को मानसिक रूप से तैयार कर लेना चाहिए| हालांकि जिन नियमो पर शेयर बाजार चलता है यदि उन नियमों को अच्छी तरह समझकर निवेश किया जाए तो नुक्सान की गुंजाइश न के बराबर होती है| लेकिन क्योंकि हम इंसानों से गलतियां होना स्वाभाविक है इसलिए यदि किसी गलत रणनीति से निवेशक को नुक्सान होता है तो उस नुक्सान से सीख लेनी चाहिए और आगे की रणनीति में इस गलती से बचना चाहिए|
2) किसी भी कम्पनी के शेयरों में निवेश करने से पहले उस कम्पनी के बारे में जानकारियां हासिल करें जैसे कम्पनी का क्या बिज़नेस है, कम्पनी किन किन सेक्टर्स में हैं, मैनेजमेंट कैसा है, वित्तीय हालत क्या है, पिछला रिकॉर्ड कैसा है, कम्पनी की भविष्य में क्या क्या योजनाए और रणनीति हैं, कम्पनी के विकास की क्या क्या संभावनाएं है इत्यादि| दूसरे लोगों की बातों में आकर या दूसरे निवेशकों को देखा देख शेयरों में निवेश न करे यदि ऐसा करते हैं तो बड़ा जोखिम झेलने के लिए भी आपको तैयार रहना चाहिए|
3) अधिकतर निवेशक जब यह देखते हैं कि किसी कम्पनी के शेयरों में लगातार वृद्धि हो रही है तो वह उस कम्पनी के शेयर को खरीद डालते हैं| केवल यह देखकर शेयर खरीदना कि क्योंकि बाजार में इस कम्पनी के शेयर की कीमत लगातार बढ़ती जा रही इसलिए यह शेयर खरीद लेना चाहिए बिलकुल गलत है| जब भी किसी कम्पनी के शेयरों की कीमतों में तेजी हो रही होती है तो यह देखना चाहिए कि क्या ये तेजी सिर्फ इसलिए है क्योंकि बाजार में तेजी है या इसलिए है कि कम्पनी की तरफ से कुछ सकारात्मक घोषणाएं की गयी हैं|
यदि कम्पनी के शेयर में तेजी केवल इसलिए है क्योंकि बाजार में तेजी है तो सावधान रहें क्योंकि ऐसे समय में इस तरह के शेयरों को खरीदना बहुत जोखिम भरा है| क्योंकि बाजार में तेजी - मंदी का चक्र चलता रहता है| तेजी के बाद मंदी आती है और मंदी के बाद तेजी आती है| हो सकता है कि आपके शेयर खरीदने के बाद मंदी का दौर शुरू हो जाए और एकदम से शेयर की कीमत गिर जाए|
यदि शेयर में तेजी इसलिए है क्योंकि कम्पनी की तरफ से कुछ सकारात्मक घोषणाएं की गयी हैं या कम्पनी की प्रगति के लिए मैनेजमेंट ने कुछ आवश्यक सकारात्मक कदम उठाये हैं, यदि इन तरह के कारणों से कम्पनी के शेयर में तेजी है तो शेयर को खरीदना फायदेमंद साबित होता है क्योंकि कम्पनी के द्वारा की गयी घोषणाएं या मैनेजमेंट द्वारा उठाये गए सकारात्मक कदम से यदि कम्पनी को भविष्य में प्रगति मिलती है तो जाहिर है आने वाले समय में कम्पनी के शेयरों में तेजी आएगी|
4) ऐसा भी देखा गया है कि जब कंपनियां भविष्य में अधिक प्रगति के लिए वर्तमान में अपने कुछ कार्यों में कमी कर देती हैं जिससे कम्पनी की आय में भी कमी हो जाती है तो इस स्थिति में कम्पनी के शेयर बिलकुल नीचे गिर जाते हैं| लेकिन यह देखा गया है कि जब कम्पनी भविष्य में अपना उद्देश्य पूरा कर अपने व्यापार को पहले से भी कई गुना बढ़ा लेती है तब कम्पनी के शेयरों में पहले से भी कई अधिक वृद्धि हो जाती है| इसलिए समय समय पर कम्पनी की रिपोर्टों पर नजर रखनी चाहिए तथा कम्पनी द्वारा नई नई योजनाओं की घोषणाओं पर भी देखते रहना चाहिए|
5) शेयर बाजार में सफलता पाने का सबसे प्रमुख तरीका "लम्बी अवधि का निवेश" माना जाता है| लम्बी अवधि में अच्छी कंपनियों के शेयरों की कीमतें अच्छा प्रदर्शन कर रही होती हैं| क्योंकि शेयर बाजार पर विभिन्न खबरों, जानकारियों, सरकारी नीतियां, ग्लोबल कारकों, अफवाहों आदि का बहुत जल्दी प्रभाव पड़ता है| इसलिए छोटे छोटे अंतरालों में अच्छी कंपनियों के शेयरों में भी काफी उठा पठक चलती रहती है लेकिन लम्बी अवधि के बाद इनके शेयरों के भाव सही मूल्य पर आ जाते हैं| लम्बी अवधि के निवेश का एक फायदा यह भी है कि ये टैक्स रहित होता है इसके विपरीत छोटी अवधि के निवेश पर टैक्स होता है| इस तरह यदि शेयर बाजार में सफल होना है तो लम्बी अवधि का दृष्टिकोण ही रखना चाहिए|
6) यदि शेयर बाजार से फायदा उठाना है तो यह काम करें :- शेयरों को कम कीमत में खरीदें और अधिक कीमत पर बेचें| व्यापार का यह सामान्य सिंद्धांत है कि कम में खरीदें और अधिक में बेचें| लेकिन यदि शेयर बाजार की बात करें तो बहुत से निवेशक ऐसा नहीं कर पाते| आइये समझते हैं ऐसा क्यों हैं| जब निवेशक चारों तरफ बाजार में तेजी और शेयरों की कीमतों में वृद्धि देखते हैं तो लालच में आकर लाभ कमाने के उद्देश्य से शेयरों को बढ़ी हुई कीमतों में ही खरीद लेते हैं जो कि कम में खरीदें इस बात के बिलकुल विपरीत है| निवेशकों को लगता है कि वह भी तेजी का हिस्सा बनकर लाभ कमा लेंगे|
जब निवेशक देखते हैं कि शेयरों की कीमत में लगातार तेजी आ रही है तो वह तब भी शेयरों को बढ़ी हुई कीमत पर नहीं बेचते क्योंकि उन्हें लगता है कि अभी और तेजी आएगी इसलिए वे लालच में आकर शेयरों की कीमत में और अधिक वृद्धि होने का इन्तजार करते रहते हैं| क्योंकि शेयर बाजार पर जानकारियों, का बहुत जल्दी प्रभाव पड़ता है| किसी भी तरह के कारण से जैसे ही बाजार में तेजी का दौर थमता है तो शेयरों की कीमतें घटने लगती हैं| निवेशकों को लगता है कि कहीं शेयर की कीमत खरीदे गए मूल्य से भी कम न हो जाए तो इसलिए निवेशक कम कीमत पर ही शेयरों को बेचना शुरू कर देते हैं जो कि इस बात के विपरीत है कि अधिक में बेंचे|
जब निवेशक इस तरह के चक्र में फंस जाते हैं तो अपनी सारी पूंजी गवा बैठते हैं| आइये समझते हैं कि इस तरह के चक्र से कैसे बचा जाए| जब बाजार में मंदी होती है तब कंपनियों के शेयरों की कीमतों में कमी आ जाती है| ऐसे समय पर अच्छी कंपनियों के शेयर कम कीमत पर खरीदे जा सकते हैं| कुछ समय बाद जब निवेशक को खरीदे गए शेयरों की कीमत में उचित वृद्धि दिखे तो कुल शेयरों में से उतने शेयर बेच देने चाहिए जिससे कि कुछ खर्च निकल जाए| बाकी बचे हुए शेयरों को लम्बी अवधि तक अधिक लाभ पाने के उद्देश्य से रख सकते हैं क्योंकि लम्बी अवधि के निवेश में जोखिम भी कम हो जाता है और शेयर के मूल्यों में भी वृद्धि हो जाती है| इस तरह शेयर कम कीमत पर खरीदें और थोड़े थोड़े समय के बाद उचित कीमत दिखने पर थोड़े थोड़े शेयर बेचकर मुनाफ़ावसूली करते रहें और बचे हुए शेयरों को लम्बी अवधि के लिए लगाते रहें|
शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है यह बात सही है| लेकिन यदि शेयर बाजार में निवेश के कुछ पक्के नियमों का धैर्य से, परिश्रम से और लगन से उपयोग किया जाए तो जोखिम को काफी कम किया जा सकता है तथा निवेश की गयी पूंजी को दोगुना तिगुना भी किया जा सकता है| आइये कुछ ऐसे नियम देखते हैं जिनका उपयोग करके शेयर बाजार में सफलता पायी जा सकती है:-
1) क्योंकि शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है इसलिए निवेशक को सबसे पहले अपने आप को मानसिक रूप से तैयार कर लेना चाहिए| हालांकि जिन नियमो पर शेयर बाजार चलता है यदि उन नियमों को अच्छी तरह समझकर निवेश किया जाए तो नुक्सान की गुंजाइश न के बराबर होती है| लेकिन क्योंकि हम इंसानों से गलतियां होना स्वाभाविक है इसलिए यदि किसी गलत रणनीति से निवेशक को नुक्सान होता है तो उस नुक्सान से सीख लेनी चाहिए और आगे की रणनीति में इस गलती से बचना चाहिए|
2) किसी भी कम्पनी के शेयरों में निवेश करने से पहले उस कम्पनी के बारे में जानकारियां हासिल करें जैसे कम्पनी का क्या बिज़नेस है, कम्पनी किन किन सेक्टर्स में हैं, मैनेजमेंट कैसा है, वित्तीय हालत क्या है, पिछला रिकॉर्ड कैसा है, कम्पनी की भविष्य में क्या क्या योजनाए और रणनीति हैं, कम्पनी के विकास की क्या क्या संभावनाएं है इत्यादि| दूसरे लोगों की बातों में आकर या दूसरे निवेशकों को देखा देख शेयरों में निवेश न करे यदि ऐसा करते हैं तो बड़ा जोखिम झेलने के लिए भी आपको तैयार रहना चाहिए|
3) अधिकतर निवेशक जब यह देखते हैं कि किसी कम्पनी के शेयरों में लगातार वृद्धि हो रही है तो वह उस कम्पनी के शेयर को खरीद डालते हैं| केवल यह देखकर शेयर खरीदना कि क्योंकि बाजार में इस कम्पनी के शेयर की कीमत लगातार बढ़ती जा रही इसलिए यह शेयर खरीद लेना चाहिए बिलकुल गलत है| जब भी किसी कम्पनी के शेयरों की कीमतों में तेजी हो रही होती है तो यह देखना चाहिए कि क्या ये तेजी सिर्फ इसलिए है क्योंकि बाजार में तेजी है या इसलिए है कि कम्पनी की तरफ से कुछ सकारात्मक घोषणाएं की गयी हैं|
यदि कम्पनी के शेयर में तेजी केवल इसलिए है क्योंकि बाजार में तेजी है तो सावधान रहें क्योंकि ऐसे समय में इस तरह के शेयरों को खरीदना बहुत जोखिम भरा है| क्योंकि बाजार में तेजी - मंदी का चक्र चलता रहता है| तेजी के बाद मंदी आती है और मंदी के बाद तेजी आती है| हो सकता है कि आपके शेयर खरीदने के बाद मंदी का दौर शुरू हो जाए और एकदम से शेयर की कीमत गिर जाए|
यदि शेयर में तेजी इसलिए है क्योंकि कम्पनी की तरफ से कुछ सकारात्मक घोषणाएं की गयी हैं या कम्पनी की प्रगति के लिए मैनेजमेंट ने कुछ आवश्यक सकारात्मक कदम उठाये हैं, यदि इन तरह के कारणों से कम्पनी के शेयर में तेजी है तो शेयर को खरीदना फायदेमंद साबित होता है क्योंकि कम्पनी के द्वारा की गयी घोषणाएं या मैनेजमेंट द्वारा उठाये गए सकारात्मक कदम से यदि कम्पनी को भविष्य में प्रगति मिलती है तो जाहिर है आने वाले समय में कम्पनी के शेयरों में तेजी आएगी|
4) ऐसा भी देखा गया है कि जब कंपनियां भविष्य में अधिक प्रगति के लिए वर्तमान में अपने कुछ कार्यों में कमी कर देती हैं जिससे कम्पनी की आय में भी कमी हो जाती है तो इस स्थिति में कम्पनी के शेयर बिलकुल नीचे गिर जाते हैं| लेकिन यह देखा गया है कि जब कम्पनी भविष्य में अपना उद्देश्य पूरा कर अपने व्यापार को पहले से भी कई गुना बढ़ा लेती है तब कम्पनी के शेयरों में पहले से भी कई अधिक वृद्धि हो जाती है| इसलिए समय समय पर कम्पनी की रिपोर्टों पर नजर रखनी चाहिए तथा कम्पनी द्वारा नई नई योजनाओं की घोषणाओं पर भी देखते रहना चाहिए|
5) शेयर बाजार में सफलता पाने का सबसे प्रमुख तरीका "लम्बी अवधि का निवेश" माना जाता है| लम्बी अवधि में अच्छी कंपनियों के शेयरों की कीमतें अच्छा प्रदर्शन कर रही होती हैं| क्योंकि शेयर बाजार पर विभिन्न खबरों, जानकारियों, सरकारी नीतियां, ग्लोबल कारकों, अफवाहों आदि का बहुत जल्दी प्रभाव पड़ता है| इसलिए छोटे छोटे अंतरालों में अच्छी कंपनियों के शेयरों में भी काफी उठा पठक चलती रहती है लेकिन लम्बी अवधि के बाद इनके शेयरों के भाव सही मूल्य पर आ जाते हैं| लम्बी अवधि के निवेश का एक फायदा यह भी है कि ये टैक्स रहित होता है इसके विपरीत छोटी अवधि के निवेश पर टैक्स होता है| इस तरह यदि शेयर बाजार में सफल होना है तो लम्बी अवधि का दृष्टिकोण ही रखना चाहिए|
6) यदि शेयर बाजार से फायदा उठाना है तो यह काम करें :- शेयरों को कम कीमत में खरीदें और अधिक कीमत पर बेचें| व्यापार का यह सामान्य सिंद्धांत है कि कम में खरीदें और अधिक में बेचें| लेकिन यदि शेयर बाजार की बात करें तो बहुत से निवेशक ऐसा नहीं कर पाते| आइये समझते हैं ऐसा क्यों हैं| जब निवेशक चारों तरफ बाजार में तेजी और शेयरों की कीमतों में वृद्धि देखते हैं तो लालच में आकर लाभ कमाने के उद्देश्य से शेयरों को बढ़ी हुई कीमतों में ही खरीद लेते हैं जो कि कम में खरीदें इस बात के बिलकुल विपरीत है| निवेशकों को लगता है कि वह भी तेजी का हिस्सा बनकर लाभ कमा लेंगे|
जब निवेशक देखते हैं कि शेयरों की कीमत में लगातार तेजी आ रही है तो वह तब भी शेयरों को बढ़ी हुई कीमत पर नहीं बेचते क्योंकि उन्हें लगता है कि अभी और तेजी आएगी इसलिए वे लालच में आकर शेयरों की कीमत में और अधिक वृद्धि होने का इन्तजार करते रहते हैं| क्योंकि शेयर बाजार पर जानकारियों, का बहुत जल्दी प्रभाव पड़ता है| किसी भी तरह के कारण से जैसे ही बाजार में तेजी का दौर थमता है तो शेयरों की कीमतें घटने लगती हैं| निवेशकों को लगता है कि कहीं शेयर की कीमत खरीदे गए मूल्य से भी कम न हो जाए तो इसलिए निवेशक कम कीमत पर ही शेयरों को बेचना शुरू कर देते हैं जो कि इस बात के विपरीत है कि अधिक में बेंचे|
जब निवेशक इस तरह के चक्र में फंस जाते हैं तो अपनी सारी पूंजी गवा बैठते हैं| आइये समझते हैं कि इस तरह के चक्र से कैसे बचा जाए| जब बाजार में मंदी होती है तब कंपनियों के शेयरों की कीमतों में कमी आ जाती है| ऐसे समय पर अच्छी कंपनियों के शेयर कम कीमत पर खरीदे जा सकते हैं| कुछ समय बाद जब निवेशक को खरीदे गए शेयरों की कीमत में उचित वृद्धि दिखे तो कुल शेयरों में से उतने शेयर बेच देने चाहिए जिससे कि कुछ खर्च निकल जाए| बाकी बचे हुए शेयरों को लम्बी अवधि तक अधिक लाभ पाने के उद्देश्य से रख सकते हैं क्योंकि लम्बी अवधि के निवेश में जोखिम भी कम हो जाता है और शेयर के मूल्यों में भी वृद्धि हो जाती है| इस तरह शेयर कम कीमत पर खरीदें और थोड़े थोड़े समय के बाद उचित कीमत दिखने पर थोड़े थोड़े शेयर बेचकर मुनाफ़ावसूली करते रहें और बचे हुए शेयरों को लम्बी अवधि के लिए लगाते रहें|
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