share par milne vala dividend kya hota he
कंपनियां वर्ष में एक या दो बार व्यापार से अर्जित लाभ का कुछ हिस्सा अपने शेयरधारकों को उनकी शेयरों की संख्यां के अनुपात में डिविडेंड के रूप में बांटती हैं| यह डिविडेंड शेयर की फैस वैल्यू पर होता है न की शेयर की बाजार कीमत पर|
share holders ko Dividend kitna diya jayegaa aur kab kab diya jayega
कंपनियां इस बात पर बाध्य नहीं होती कि शेयरधारकों को हर हालत में डिविडेंड दिया जाएगा| शेयरधारकों को डिविडेंड का बांटना या ना बांटना कम्पनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स द्वारा निर्धारित किया जाता है| बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ही तय करते हैं कि कम्पनी के लाभ का कितना हिस्सा डिविडेंड के रूप में बांटा जाएगा, वर्ष में कितनी बार और कब कब बांटा जाएगा|
कंपनियां जो अपने को अच्छे से स्थापित कर चुकी हैं और अधिक मुनाफे के साथ व्यापार करती हैं, ऐसी अधिकतर कंपनियां अपने शेयरधारकों को नियमित रूप से डिविडेंड देती हैं|
स्टार्ट-अप कंपनियां या ऐसी कंपनियां जो विकसित हो रही होती हैं, हो सकता है अपने शेयरधारकों को नियमित रूप से लाभांश न दे| क्योंकि ये कंपनियां विकास के शुरूआती चरण पर होती हैं इसलिए अधिकतर धन कम्पनी के विस्तार और व्यापारिक गतिविधियों में लगाया जाता है, इसलिए हो सकता है कम्पनी के पास लाभांश जारी करने के लिए पर्याप्त धन न हो, इसलिए कंपनियां लाभांश भुगतान करने से बचती हैं| इस तरह लाभांश का बांटा जाना इस बात पर भी निर्भर करता है कि कम्पनी किस स्तर पर व्यापार कर रही है|
कंपनियां वर्ष में एक या दो बार व्यापार से अर्जित लाभ का कुछ हिस्सा अपने शेयरधारकों को उनकी शेयरों की संख्यां के अनुपात में डिविडेंड के रूप में बांटती हैं| यह डिविडेंड शेयर की फैस वैल्यू पर होता है न की शेयर की बाजार कीमत पर|
share holders ko Dividend kitna diya jayegaa aur kab kab diya jayega
कंपनियां इस बात पर बाध्य नहीं होती कि शेयरधारकों को हर हालत में डिविडेंड दिया जाएगा| शेयरधारकों को डिविडेंड का बांटना या ना बांटना कम्पनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स द्वारा निर्धारित किया जाता है| बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ही तय करते हैं कि कम्पनी के लाभ का कितना हिस्सा डिविडेंड के रूप में बांटा जाएगा, वर्ष में कितनी बार और कब कब बांटा जाएगा|
कंपनियां जो अपने को अच्छे से स्थापित कर चुकी हैं और अधिक मुनाफे के साथ व्यापार करती हैं, ऐसी अधिकतर कंपनियां अपने शेयरधारकों को नियमित रूप से डिविडेंड देती हैं|
स्टार्ट-अप कंपनियां या ऐसी कंपनियां जो विकसित हो रही होती हैं, हो सकता है अपने शेयरधारकों को नियमित रूप से लाभांश न दे| क्योंकि ये कंपनियां विकास के शुरूआती चरण पर होती हैं इसलिए अधिकतर धन कम्पनी के विस्तार और व्यापारिक गतिविधियों में लगाया जाता है, इसलिए हो सकता है कम्पनी के पास लाभांश जारी करने के लिए पर्याप्त धन न हो, इसलिए कंपनियां लाभांश भुगतान करने से बचती हैं| इस तरह लाभांश का बांटा जाना इस बात पर भी निर्भर करता है कि कम्पनी किस स्तर पर व्यापार कर रही है|
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