Share bajar me paisa lagane se pehle va sheyaron me nivesh karne se pehle kin baton kaa dhyaan rakhen.
निवेशकों के मन में हमेशा यही बात चलती रहती है कि अपनी पूंजी को कहाँ और कैसे निवेश पे लगाया जाए जिससे उन्हें अच्छा रिटर्न मिलें| हर कोई यही चाहता है कि निवेश करने के बाद वह ऐसी स्थिति में न आए जिसमे उसको उचित रिटर्न न मिले या उसकी पूंजी ही न फंस जाए| यदि शेयर बाजार की बात करें तो इसमें निवेश काफी जोखिम भरा होता है इसलिए यहां काफी सम्भल कर निवेश करना होता है| यहां कुछ ऐसी मुख्य बातें बताई गयी हैं जिनको यदि निवेश करने से पहले ध्यान में रखा जाए तो ऊपर बताई हुई स्थिति से काफी हद तक बचा जा सकता है :-
1) निवेश में हमेशा जोखिम रहता है| इसलिए निवेशक की जोखिम लेने की क्षमता ही यह बताती है कि उसे कहाँ निवेश करना चाहिए| यदि आप बिलकुल भी जोखिम नहीं लेना चाहते तो बेहतर है फिसिकल एसेट्स में निवेश करें जैसे सोना, फिक्स्ड डिपाजिट, प्रॉपर्टी, सीनियर सिटीजन सेविंग स्किम, पब्लिक प्रोविडेंट फंड, सरकारी सिक्योरिटीज, सरकारी बांड आदि|
2) यदि आप थोड़ा जोखिम ले सकते हैं तो अपनी पूंजी के दो हिस्से करें| एक हिस्से को फिक्स्ड एसेट्स में निवेश करें और दूसरे हिस्से को शेयर बाजार व इक्विटी में लगाएं| यदि फिक्स्ड एसेट्स जैसे फिक्स्ड डिपाजिट, सीनियर सिटीजन सेविंग स्किम, सरकारी बांड इत्यादि में निवेश करते हैं तो इसमें तयशुदा व निश्चित ब्याज मिलता है| अब यदि इक्विटी में उचित रिटर्न नहीं भी मिलता तो फिक्स्ड एसेट्स निवेश से मिले ब्याज से इसकी भरपाई हो जाएगी| लेकिन यदि अच्छी कंपनियों के शेयरों में निवेश किया जाए तो इनमे जोखिम की संभावना कम होती है| अब सवाल यह उठता है कि पूंजी का कितना प्रतिशत फिक्स्ड एसेट्स में लगाएं और कितना प्रतिशत इक्विटी में लगाएं| यदि आप बहुत ही कम जोखिम लेना चाहते हैं तो 70 प्रतिशत पूंजी फिक्स्ड एसेट्स में लगाएं और 30 प्रतिशत इक्विटी में लगाएं| यदि आपकी जोखिम क्षमता अधिक है तो इस प्रतिशत को घटा बढ़ा सकते हैं|
3) निवेश से मिलने वाले रिटर्न पर मंहगाई दर भी प्रभाव डालती है| उदाहरण के लिए यदि मंहगाई दर 8 प्रतिशत है और फिक्स्ड डिपाजिट या अन्य फिक्स्ड एसेट पर आपको 8 प्रतिशत रिटर्न मिल रहा है तो इसका अर्थ है कि आपको कोई फायदा नहीं हो रहा| इसलिए निवेश से मिलने वाला रिटर्न महंगाई दर से अधिक होना चाहिए| अर्थात किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले देख लें कि रिटर्न का प्रतिशत कितना है और मंहगाई की दर कितनी है| रिटर्न का प्रतिशत निकालते समय टैक्स को भी ध्यान में रखें क्योंकि यह रिटर्न के प्रतिशत को और कम कर देता है|
4) सबसे अधिक रिटर्न इक्विटी से मिलता है लेकिन इसमें जोखिम भी अधिक होता है| यदि शेयरों के निवेश के जोखिम को कम करना है तो केवल अच्छी कंपनियों के शेयरों में ही लम्बी अवधि के लिए निवेश करें| यदि अच्छी फंडामेंटल कंपनियों में लम्बी अवधि तक निवेश करें तो इससे जोखिम कम हो जाता है क्योंकि ऐसी कंपनियों के शेयर लम्बी अवधि के बाद एक अच्छे स्तर पर पहुँच जाते हैं हालांकि छोटी अवधि के अंतरालों में आये बाजार के उतार चढ़ाव से इनके शेयरों की कीमत पर भी उतार चढ़ाव आता है लेकिन एक लम्बी अवधि के बाद इनके शेयर अच्छा प्रदर्शन कर रहे होते हैं|
5) यदि आपके पास पूंजी कम है लेकिन आप कम समय में अधिक जोखिम लेकर उचित रिटर्न पाना चाहते हैं तो किसी भी योजना में निवेश करने से पहले अपने भविष्य की तैयारी करके रखें| उदाहरण के लिए निवेश से पहले इंश्योरेंस, इमरजेंसी फंड, मेडिकल फंड और रिटायरमेंट के लिए धन बचाकर रखें अन्यथा आप मुश्किल में पड़ सकते हैं|
6) यदि आपको निवेश की तकनीकियों और बाजार के उतार चढ़ाव को समझने में परेशानी हो तो बेहतर यही है कि आप एक अच्छे प्रोफेशनल एडवाइजर की सलाह लें| यह एडवाइजर आपकी निवेश संबंधी परेशानियों को हल करेगा और निवेश के ऐसे विकल्प बताएगा जो आपके लिए फायदेमंद होंगे| लेकिन इस बात का भी ध्यान रहे कि अपने एडवाइजर पर आँख बंद करके भरोसा न करें उससे सवाल पूछते रहें| यदि वह आपको निवेश का कोई विकल्प बताता है तो उससे पूछें कि क्यों यह विकल्प आपके लिए अच्छा रहेगा|
निवेशकों के मन में हमेशा यही बात चलती रहती है कि अपनी पूंजी को कहाँ और कैसे निवेश पे लगाया जाए जिससे उन्हें अच्छा रिटर्न मिलें| हर कोई यही चाहता है कि निवेश करने के बाद वह ऐसी स्थिति में न आए जिसमे उसको उचित रिटर्न न मिले या उसकी पूंजी ही न फंस जाए| यदि शेयर बाजार की बात करें तो इसमें निवेश काफी जोखिम भरा होता है इसलिए यहां काफी सम्भल कर निवेश करना होता है| यहां कुछ ऐसी मुख्य बातें बताई गयी हैं जिनको यदि निवेश करने से पहले ध्यान में रखा जाए तो ऊपर बताई हुई स्थिति से काफी हद तक बचा जा सकता है :-
1) निवेश में हमेशा जोखिम रहता है| इसलिए निवेशक की जोखिम लेने की क्षमता ही यह बताती है कि उसे कहाँ निवेश करना चाहिए| यदि आप बिलकुल भी जोखिम नहीं लेना चाहते तो बेहतर है फिसिकल एसेट्स में निवेश करें जैसे सोना, फिक्स्ड डिपाजिट, प्रॉपर्टी, सीनियर सिटीजन सेविंग स्किम, पब्लिक प्रोविडेंट फंड, सरकारी सिक्योरिटीज, सरकारी बांड आदि|
2) यदि आप थोड़ा जोखिम ले सकते हैं तो अपनी पूंजी के दो हिस्से करें| एक हिस्से को फिक्स्ड एसेट्स में निवेश करें और दूसरे हिस्से को शेयर बाजार व इक्विटी में लगाएं| यदि फिक्स्ड एसेट्स जैसे फिक्स्ड डिपाजिट, सीनियर सिटीजन सेविंग स्किम, सरकारी बांड इत्यादि में निवेश करते हैं तो इसमें तयशुदा व निश्चित ब्याज मिलता है| अब यदि इक्विटी में उचित रिटर्न नहीं भी मिलता तो फिक्स्ड एसेट्स निवेश से मिले ब्याज से इसकी भरपाई हो जाएगी| लेकिन यदि अच्छी कंपनियों के शेयरों में निवेश किया जाए तो इनमे जोखिम की संभावना कम होती है| अब सवाल यह उठता है कि पूंजी का कितना प्रतिशत फिक्स्ड एसेट्स में लगाएं और कितना प्रतिशत इक्विटी में लगाएं| यदि आप बहुत ही कम जोखिम लेना चाहते हैं तो 70 प्रतिशत पूंजी फिक्स्ड एसेट्स में लगाएं और 30 प्रतिशत इक्विटी में लगाएं| यदि आपकी जोखिम क्षमता अधिक है तो इस प्रतिशत को घटा बढ़ा सकते हैं|
3) निवेश से मिलने वाले रिटर्न पर मंहगाई दर भी प्रभाव डालती है| उदाहरण के लिए यदि मंहगाई दर 8 प्रतिशत है और फिक्स्ड डिपाजिट या अन्य फिक्स्ड एसेट पर आपको 8 प्रतिशत रिटर्न मिल रहा है तो इसका अर्थ है कि आपको कोई फायदा नहीं हो रहा| इसलिए निवेश से मिलने वाला रिटर्न महंगाई दर से अधिक होना चाहिए| अर्थात किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले देख लें कि रिटर्न का प्रतिशत कितना है और मंहगाई की दर कितनी है| रिटर्न का प्रतिशत निकालते समय टैक्स को भी ध्यान में रखें क्योंकि यह रिटर्न के प्रतिशत को और कम कर देता है|
4) सबसे अधिक रिटर्न इक्विटी से मिलता है लेकिन इसमें जोखिम भी अधिक होता है| यदि शेयरों के निवेश के जोखिम को कम करना है तो केवल अच्छी कंपनियों के शेयरों में ही लम्बी अवधि के लिए निवेश करें| यदि अच्छी फंडामेंटल कंपनियों में लम्बी अवधि तक निवेश करें तो इससे जोखिम कम हो जाता है क्योंकि ऐसी कंपनियों के शेयर लम्बी अवधि के बाद एक अच्छे स्तर पर पहुँच जाते हैं हालांकि छोटी अवधि के अंतरालों में आये बाजार के उतार चढ़ाव से इनके शेयरों की कीमत पर भी उतार चढ़ाव आता है लेकिन एक लम्बी अवधि के बाद इनके शेयर अच्छा प्रदर्शन कर रहे होते हैं|
5) यदि आपके पास पूंजी कम है लेकिन आप कम समय में अधिक जोखिम लेकर उचित रिटर्न पाना चाहते हैं तो किसी भी योजना में निवेश करने से पहले अपने भविष्य की तैयारी करके रखें| उदाहरण के लिए निवेश से पहले इंश्योरेंस, इमरजेंसी फंड, मेडिकल फंड और रिटायरमेंट के लिए धन बचाकर रखें अन्यथा आप मुश्किल में पड़ सकते हैं|
6) यदि आपको निवेश की तकनीकियों और बाजार के उतार चढ़ाव को समझने में परेशानी हो तो बेहतर यही है कि आप एक अच्छे प्रोफेशनल एडवाइजर की सलाह लें| यह एडवाइजर आपकी निवेश संबंधी परेशानियों को हल करेगा और निवेश के ऐसे विकल्प बताएगा जो आपके लिए फायदेमंद होंगे| लेकिन इस बात का भी ध्यान रहे कि अपने एडवाइजर पर आँख बंद करके भरोसा न करें उससे सवाल पूछते रहें| यदि वह आपको निवेश का कोई विकल्प बताता है तो उससे पूछें कि क्यों यह विकल्प आपके लिए अच्छा रहेगा|
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