Company share | Stock kyon jari - sell karti hen | kyon issue kiye jate he share
हर एक कम्पनी का उद्देश्य होता है की वे अपने बिज़नेस व व्यापार को बढ़ाए| व्यापार बढ़ाने और कम्पनी को ऊंचे स्तर तक ले जाने के लिए अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है| अधिक पूंजी हासिल करने का सबसे सामान्य तरीका है कि कम्पनी कुछ ऐसे चुनिंदा लोगों से धन एकत्रित करें जो कि कम्पनी के साथ अच्छे व दोस्ताना संबंध रखते हैं| इस तरह कुछ चुनिंदा लोगों से धन लेने के बदले में इन्हे कम्पनी में हिस्सेदारी दे दी जाती है| क्योंकि कम्पनी से दोस्ताना संबंध रखने वालो की संख्या बहुत ही सिमित व कम होती है इसलिए इस तरीके से अधिक मात्रा में धन एकत्रित नहीं किया जा सकता|
जो निवेशक शेयर खरीदते हैं वे कम्पनी के शेयर होल्डर्स बन जाते हैं| शेयर खरीदने के बाद शेयर होल्डर्स कम्पनी के हिस्सेदार बन जाते हैं जब कम्पनी अच्छा बिज़नेस कर रही होती है तो शेयर होल्डर अधिक कीमत पर अपने शेयर्स किसी दूसरे निवेशक को बेच सकता है| इस प्रकार वह लाभ कमा सकता है| कम्पनी द्वारा निवेशकों को प्रतिवर्ष कुछ डिविडेंड भी दिया जाता है| हालांकि यदि कम्पनी को नुक्सान होता है तो इसका जोखिम निवेशक को भी उठाना पड़ता है| जब कम्पनी अपना बिज़नेस बंद करती है तो सारी उधारी व देनदारी चुकाने के बाद ही शेयर होल्डर्स को उनकी शेयरों की संख्या के अनुपात में धन बांटा जाता है| यदि देनदारियां चुकाने के बाद कम्पनी के पास कुछ नहीं बचता तो शेयर होल्डर्स को कुछ भी नहीं मिलता|
हर एक कम्पनी का उद्देश्य होता है की वे अपने बिज़नेस व व्यापार को बढ़ाए| व्यापार बढ़ाने और कम्पनी को ऊंचे स्तर तक ले जाने के लिए अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है| अधिक पूंजी हासिल करने का सबसे सामान्य तरीका है कि कम्पनी कुछ ऐसे चुनिंदा लोगों से धन एकत्रित करें जो कि कम्पनी के साथ अच्छे व दोस्ताना संबंध रखते हैं| इस तरह कुछ चुनिंदा लोगों से धन लेने के बदले में इन्हे कम्पनी में हिस्सेदारी दे दी जाती है| क्योंकि कम्पनी से दोस्ताना संबंध रखने वालो की संख्या बहुत ही सिमित व कम होती है इसलिए इस तरीके से अधिक मात्रा में धन एकत्रित नहीं किया जा सकता|
अधिक पूंजी जुटाने का दूसरा तरीका है कम्पनी द्वारा सामान्य लोगों व निवेशकों के लिए शेयर जारी करना| जब कम्पनी द्वारा शेयर जारी किये जाते हैं तो कोई भी निवेशक शेयर खरीद सकता है क्योंकि इस बात पर कोई पाबंदी नहीं होती कि कितने निवेशक कम्पनी के शेयर खरीदेंगे इसलिए कम्पनी के अधिक शेयर बहुत सारे निवेशकों द्वारा खरीद लिए जाते हैं| इस तरह अधिक शेयर बिकने से कम्पनी को अधिक मात्रा में धन प्राप्त हो जाता है| इस तरह शेयरों द्वारा अधिक पूंजी एकत्रित करके कम्पनी अपने उद्देश्यों को पूरा करती है|
जो निवेशक शेयर खरीदते हैं वे कम्पनी के शेयर होल्डर्स बन जाते हैं| शेयर खरीदने के बाद शेयर होल्डर्स कम्पनी के हिस्सेदार बन जाते हैं जब कम्पनी अच्छा बिज़नेस कर रही होती है तो शेयर होल्डर अधिक कीमत पर अपने शेयर्स किसी दूसरे निवेशक को बेच सकता है| इस प्रकार वह लाभ कमा सकता है| कम्पनी द्वारा निवेशकों को प्रतिवर्ष कुछ डिविडेंड भी दिया जाता है| हालांकि यदि कम्पनी को नुक्सान होता है तो इसका जोखिम निवेशक को भी उठाना पड़ता है| जब कम्पनी अपना बिज़नेस बंद करती है तो सारी उधारी व देनदारी चुकाने के बाद ही शेयर होल्डर्स को उनकी शेयरों की संख्या के अनुपात में धन बांटा जाता है| यदि देनदारियां चुकाने के बाद कम्पनी के पास कुछ नहीं बचता तो शेयर होल्डर्स को कुछ भी नहीं मिलता|
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